संक्षिप्त इतिहास

भारत के 68वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उद्योगों मुख्यतः भारत के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (Micro, Small, and Medium Enterprizes, MSME) से यह सुनिश्चित करने के लिए आग्रह किया है कि देश में वस्तुओं का निर्माण करने में उत्पाद में कोई दोष न हो (जीरो डिफेक्ट, ZERO DEFECT) और उसके निर्माण के दौरान पर्यावरण पर कोई प्रभाव न पड़े (जीरो इफ़ेक्ट, ZERO EFFECT)|

"हम वो manufacturing करें जिसमें zero defect हो ताकि दुनिया के बाजार से कभी वापस ना आये और हम वो manufacturing करें जिसमे zero effect हो, पर्यावरण पर इसका कोई negative effect ना पड़े|"

भारत को एक निर्माण केंद्र बनाने के उद्देश्य के साथ, प्रधानमंत्री ने दुनिया को एक खुला निमंत्रण दिया और दुनिया भर के निर्माताओं और निवेशकों से अपील की है कि वे भारत में आकर अपने निर्माण इकाइयों को स्थापित करें|

"मैं विश्वभर के लोगों से कहना चाहता हूँ, "Come, Make in India", "आइये हिंदुस्तान में निर्माण कीजिये|" दुनिया के किसी भी कोने में जाकर बेचिए, लेकिन निर्माण यहाँ कीजिये| हमारे पास skill है, talent है, discipline है, कुछ कर गुजरने का इरादा है| हम विश्व को एक अनूकुल अवसर देना चाहते है, "Come, Make in India", और हम विश्व को कहते है, electrical से लेकर electronic तक, "Come, Make in India", chemical से लेकर pharmaceutical तक, "Come, Make in India", automobile से लेकर के agro value addition तक, "Come, Make in India", पेपर हो या प्लास्टिक, "Come, Make in India", satellite हो या submarine, "Come, Make in India"| ताकत है हमारे देश में, आइये मैं निमंत्रण देता हूँ|"

"प्रधानमंत्री जी के शब्दों में, 'जैसे में विश्व से कहता हूँ, "Make in India", मैं देश के नौजवानों को कहता हूँ, हमारा सपना होना चाहिए कि दुनिया के हर कोने में ये बात पहुंचनी चाहिए "Made In India"| ये हमारा सपना होना चाहिए|"

MSMEs की प्रतिस्पर्धा क्षमता को सुनिश्चित करना आवश्यक है, क्योंकि इससे राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था एवं निर्माण क्षेत्र के समग्र विकास में मदद मिलेगी|

"Make in India" तभी सफल हो सकता है, जब MSMEs की प्रतिस्पर्धा क्षमता में सुधार हो| वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा कर रही अंतर्राष्ट्रीय कम्पनियाँ ZERO DEFECT और ZERO EFFECT के लिए बाजार में स्वीकृत लागतों, प्रौद्योगिकी, नवाचार, सेवा वितरण, अनुत्पादक निर्माण (lean manufacturing), और दोष मुक्त उत्पादों जैसी अपनीप्रतिस्पर्धी क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित करती है| हमें निर्यात बाजार में छाप छोड़ने और अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में सुधार करने के लिए अपने औद्योगीकरण रूपरेखा और निर्यात वृद्धि को शीघ्र गति प्रदान करनी ही होगी| वर्तमान में हमारा सकल घरेलू उत्पाद (14%) निम्न-मध्यम आय वाले देशों के औसत GDP (15.80%) से थोड़ी कम और उच्च मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के औसत (23.05%) से काफी कम है|

हमें MSMEs की क्षमता विकसित करने के लिए, उनकी प्रौद्योगिकियों (technologies), विपणन (मार्केटिंग), अग्रगामी और पश्चगामी सम्बन्धों को सुगम करने के लिए, कड़ियों और मध्यवर्ती संस्थाओं की स्थापना करनी पड़ेगी| दुनिया भर में, MSMEs को समान विकास को बढ़ावा देने के लिए और आर्थिक विकास को प्रोत्साहन देने वाले कारक के तौर पर स्वीकार किया गया है| MSME अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं के सभी उद्योगों का 90% अधिक है और इसको सबसे अधिक रोजगार पैदा करने तथा औद्योगिक उत्पादन एवं निर्यात के एक प्रमुख हिस्से के लिए उत्तरदायी होने का श्रेय दिया जाता है|

ज़ेड एक ऐसा मॉडल प्रस्तुत करता है जहाँ गुणवत्ता की अवधारणा, प्रतिस्पर्धा के स्रोत से अनुपालन के उपकरण के लिए, एक समग्र परिवर्तन है| क्रियात्मक रूप से इसे अंतिम उत्पाद के निरीक्षण पर सम्पूर्ण निर्भरता के बजाय दोष सुधार, गुणवत्ता योजना, उत्पाद और प्रक्रिया डिज़ाइन, अनुकूलतम (optimum) प्रक्रियाओं, संसाधनों का कुशल प्रबंधन, प्रभावी आउटसोर्सिंग गतिविधियों और सफल परिणामों जैसे गुणवत्ता के Enabler कारकों की एक सक्रिय प्रक्रिया के विकास हेतु बनाया गया है| सभी उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता के साथ उत्पाद और प्रक्रिया डिज़ाइन, पूर्व-उत्पादन (स्टार्ट-अप गतिविधियों), उत्पादन और रखरखाव की गतिविधियों, पश्च उत्पादन (इस्तेमाल के बाद निपटान) और पर्यावरण प्रदर्शन के निष्कर्ष पर उचित योजना के माध्यम से पर्यावरण पर इनके प्रभाव को समाप्त करने पर सामान बल दिया जाता है। इसका शुद्ध परिणाम सतत विकास है।

ज़ेड योजना एक एकीकृत और समग्र प्रत्यायन प्रणाली है, जो उत्पाद और निर्माण की प्रक्रिया में गुणवत्ता, उत्पादकता, ऊर्जा दक्षता, प्रदूषण शमन, वित्तीय स्थिति, मानव संसाधन और तकनीकी गहराई दोनों डिज़ाइन और IPR सहित, के लिए योगदान दे सकता है| इस योजना के मापदंडों द्वारा MSMEs के मौजूदा योजनाओं के सभी पहलुओं, गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS) / गुणवत्ता प्रौद्योगिकी उपकरण (QTT), Lean निर्माण प्रतिस्पर्धा कार्यक्रम (LMCS), डिजाइन क्लिनिक, और प्रौद्योगिकी एवं गुणवत्ता आधुनिकरण (TEQUP) और IPR पर जागरूक बनाने, को सम्मिलित किया जायेगा।

सार्वजनिक और निजी दोनों ही क्षेत्रों में नवीनतम नीति के साधनों और बाजार हस्तक्षेप, MSMEs के लिए सार्वजनिक खरीद नीति के कार्यान्वयन से आरम्भ होते है, जो CPSUs को अपनी वार्षिक खरीद का 20% भाग MSMEs से खरीदने को अनिवार्य करता है| एकल और multi-brand खुदरा दोनों और विभिन्न निर्माण क्षेत्रों जैसे- रेलवे और रक्षा में FDI, ई-व्यापार को विभिन्न मंत्रो जैसे-flipkart और snapdeal, भारतीय ऑफसेट भागीदारों (IOP) की कमी के साथ तेजी से प्रेरित करता है और रक्षा आयात में ऑफसेट बिकवाली, मजबूत निर्माण क्षेत्र जैसे-ESDM और एयरोस्पेस के उभार, और अंत में विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी उत्पादों के साथ वैश्विक बाजार में प्रवेश करने का अवसर में आ रही कठिनाईयां पर्याप्त मल्टीप्लायरों और ड्राइवर हैं जो न केवल ज़ेड निर्माण को आगे ले जा सकता है बल्कि देश में तेजी से बदलते मार्केटिंग परिदृश्यों का भी समर्थन कर सकता है| यह निश्चित रूप से आने वाले दिनों में सभी हितधारकों (stakeholders) के लिए एक लाभ की स्थिति होगी।